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कविता: समय, समाज और विचारधारा (परिचर्चा)

180 /-  INR
उपलब्धता: स्टॉक में है
कैटेगरी: अन्य
भाषा: हिन्दी
आईएसबीएन: 978-93-94061-86-6
पृष्ठ: 156
प्रकाशन तिथि:
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कविता विवेक के सामंजस्य के साथ मनुष्य–हृदय की आवाज है । कविता को जीवन प्राप्त करने या जीवित रहने के लिए अपने जीवन्त समय, संघर्षशील समाज और विकासशील अग्रगामी विचारधारा से सम्पृक्त रहना अनिवार्य है । इनके अभाव में कविता कविता नहीं होती, और चाहे जो कुछ भी हो । कविता के पास बहुआयामी प्रखर दृष्टि होती है, जो वर्तमान, अतीत और भविष्य, चाहे जहाँ जिस रूप में भी हों, को आलोकित, अंकित, चिन्हित, प्रतीकित करती चलती है । आँधी, तूफान इसे रोक नहीं सकते, बल्कि वहाँ यह और तेज हो जाती है । यहाँ ‘कविता % समय, समाज और विचारधारा’ पुस्तक के द्वारा अभी के महत्वपूर्ण कुछ सवालों पर विभिन्न रचनाकारों के विचार एक जगह प्रस्तुत किए जा रहे हैं । ऐसे सवालों पर पुस्तक– रूप में इस प्रकार की प्रस्तुति संभवत% पहली बार की जा रही है ।

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शंभु बादल शंभु बादल

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