डॉ– भगवानदास माहौर उस टोली के एक सिपाही थे जिसके नेता अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद तथा भगत सिंह थे । इनका यह विश्वास था कि आजादी भीख माँगने से प्राप्त नहीं होगी, इसके लिए लड़ना पड़ेगा और बड़ी बहादुरी से ये नौजवान लड़े तथा शहीद हुए । अंग्रेजी सरकार का किसी भी प्रकार का दमन इन वीरों को अपने रास्ते से डिगा नहीं पाया ।
ऐसा नहीं था कि ये लोग केवल आजादी प्राप्त करने मात्र के लिए ही मरते रहे थे । इनके सामने समाजवाद की स्थापना का स्पष्ट लक्ष्य था । वे एक ऐसे समाज की स्थापना चाहते थे जिसमें किसी भी प्रकार का शोषण न हो सके । देश की आजादी के लिए क्रान्तिकारियों ने क्या किया यह महत्वपूर्ण बात नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण बात यह है कि किन आदर्शों के लिए वे शहीद हुए तथा किस प्रकार की समाज व्यवस्था की स्थापना वे करना चाहते थे ।
–इसी पुस्तिका से
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राम सिंह बघेले |
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